इंटरनेट क्या है(internet kya hai) और इंटरनेट कैसे काम करता है? no.1 Free hindi Guide

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नमस्कार मित्रों मेरा नाम आनंद पटेल है, और यहाँ हम इंटरनेट के बारे में चर्चा करने वाले हैं, हम सभी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इंटरनेट का उपयोग करते हैं पर यदि कोई पूछे की इंटरनेट क्या है(internet kya hai) और इंटरनेट कैसे काम करता है, तो सैद्धांतिक रूप से हमारे लिए यह समझा पाना मुश्किल हो जाता है क्युकि हम सिर्फ इंटरनेट का उपयोग करते हैं, हमने कभी उसके बारे में या उसकी शब्दावली के बारे में पढ़ा या समझा नहीं है।

इंटरनेट पूरी दुनिया में एक दूसरे से कनेक्टेड कम्प्यूटर्स का एक वैश्विक नेटवर्क है और इंटरनेट उन्हें मिलिसेकण्ड्स में अपना डाटा एक दूसरे को भेजने और प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करता है जब भी कोई इंटरनेट से कनेक्ट होता है तो वह इंटरनेट की मदद से पूरी दुनिया की किसी भी प्रकार की जानकारी को प्राप्त कर सकता है।

अगर आप यह पोस्ट पढ़ रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आपके मन में भी इंटरनेट से जुड़े कुछ प्रश्न हैं जैसे- इंटरनेट क्या होता है(internet Kya Hai/What Is Internet in Hindi) और इंटरनेट कैसे काम करता है, इंटरनेट का इतिहास क्या है, इंटरनेट कनेक्शन कितने प्रकार के होते हैं, www Kya Hai, IP address Kya Hai, client Kya Hai, server Kya Hai, और बहुत कुछ, तो हमारे साथ अंत तक बने रहिये जिससे आप इन सब प्रश्नो के उत्तर और,और भी बहुत कुछ जान पाएंगे।

इंटरनेट क्या है(Internet Kya Hai in Hindi) और इंटरनेट कैसे काम करता है

यहाँ हम इंटरनेट क्या है (Internet kya hai), इंटरनेट कैसे काम करता है, इंटरनेट का इतिहास सब कुछ एक-एक करके जानेंगे

Internet Kya Hai(What Is Internet in Hindi)

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हम इंटरनेट के नाम से क्या समझते हैं, इंटरनेट का मतलब होता है कम्प्यूटर्स का वैश्विक नेटवर्क, जब दो या दो से अधिक कम्प्यूटर्स एक दूसरे से कनेक्टेड होते हैं तो वह इंटरनेट कहलाता है।

इंटरनेट पूरी दुनिया में एक दूसरे से कनेक्टेड कम्प्यूटर्स का एक वैश्विक नेटवर्क है और इंटरनेट उन्हें मिलिसेकण्ड्स में अपना डाटा एक दूसरे को भेजने और प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करता है जब भी कोई इंटरनेट से कनेक्ट होता है तो वह इंटरनेट की मदद से पूरी दुनिया की किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकता है।

इंटरनेट असंख्य कम्प्यूटर्स के बीच एक कनेक्शन है जो पूरी दुनिया में एक दूसरे से जुड़े होते हैं, इंटरनेट पर हम पूरी दुनिया की जानकारी प्राप्त करते हैं और इसी इंटरनेट के कारण दुनिया इतनी छोटी हो गई है।

इंटरनेट का इतिहास(History of internet in Hindi)

1969 में इंसान चाँद पर गए, अमेरिका के डिफेन्स डिपार्टमेंट ने एक एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी (ARPA) को नियुक्त किया और उन्होंने चार कम्प्यूटर्स का एक नेटवर्क बनाया और उस नेटवर्क के जरिये अपनी जानकारी और डाटा को एक दूसरे के साथ साँझा किया।

उसके बाद उन्होंने बहुत सारी यूनिवर्सिटीज और एजेंसियों से संपर्क किया और इस नेटवर्क से जुड़ने और अपनी जानकारी साँझा करने को कहा।

यह इंटरनेट की शुरुवात थी इसके बाद उन्होंने इंजीनियर, वैज्ञानिक, और अनुसंधानकर्ताओं को नियुक्त किया, जिन्होंने इसे और आगे बढ़ाया और कुछ समय बाद उन्होंने इसे प्राइवेट एजेंसियों और आम जनता के लिए खोल दिया, और सबसे दिलचस्प बात ये है की इनमेसे कोई भी एजेंसी इंटरनेट को मेन्टेन नहीं करती।

भारत में सबसे पहले 15 अगस्त 1995 को सरकारी कंपनी विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) द्वारा भारतीय जनता के लिए इंटरनेट सर्विसेज की शुरुआत की गई, और फिर धीरे धीरे निजी कंपनियों जैसे एयरटेल, टाटा, रिलायंस और अन्य ने अपनी इंटरनेट सर्विसेज प्रदान करना शुरू किया।

WWW एक बहुत बड़ा कंप्यूटर नेटवर्क है जिसका उपयोग करने के लिए बहुत से ब्राउज़र बनाये गए जैसे गूगल क्रोम, मोज़िला, इंटरनेट एक्स्प्लोरर और सभी वेबसाइट को अलग दिखने के लिए सबको एक अलग और यूनिक एड्रेस प्रदान किया गया जिसे URL कहते हैं जिसका पूरा नाम यूनिक रिसोर्स लोकेटर है।

WWW में लाखों करोड़ों डाक्यूमेंट्स और वेब पेज हैं और उन वेब पेजों में अरबों टेक्स्ट, इमेज, वीडियो, फाइल्स और लिंक्स हैं जिन्हे hyperlinks के द्वारा देखा जा सकता है।

यहाँ हमने जाना Internet kya hai और इसकी शुरुआत कैसे हुई अब हम जानेगे इंटरनेट कैसे काम करता है।

इंटरनेट कैसे काम करता है?(How does internet work)

इंटरनेट दुनिया भर में फैला कम्प्यूटर्स का नेटवर्क है जो टेलीफोन केबल्स और सेटेलाइट के द्वारा एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. आसान शब्दों में समझने के लिए हम इसे दो भागों में बाटेंगे पहला है सर्वर, जहाँ पर सारी जानकारी संग्रहित की जाती है और दूसरे सर्वर्स पर भेजी जाती है, सभी लोग इन्ही सर्वर्स से सारी जानकारी प्राप्त करते हैं।

दूसरा भाग होता है ब्राउज़र, अगर आप कोई भी जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं जो सर्वर पर संग्रहित है तो आपको एक ब्राउज़र की जरुरत पड़ेगी जैसे क्रोम, फिरफोक्स, एक्स्प्लोरर या कोई और। जब भी आप अपना कंप्यूटर इंटरनेट से कनेक्ट करते हो तो आपका कंप्यूटर सबसे पहले आपके इंटरनेट सर्विसेज प्रोवाइडर (ISP ) के सर्वर से कनेक्ट होता है।

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इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी का सर्वर बाकि इंटरनेट और अन्य ब्राउज़र के साथ जुड़ा होता है और जब उसे आपके ब्राउज़र से किसी फाइल, ईमेल, इमेज, या वीडियो के लिए कोई रिक्वेस्ट मिलती है, तो वह अपने डाटा में उस जानकारी को ढूंढता है और यदि वह जानकारी उसके डाटा में नहीं होती तो वह उस डाटा के प्रमुख सर्वर (host server ) से जुड़ता है और जानकारी/डाटा/वीडियो प्राप्त करके आपके ब्राउज़र को देता है और ब्राउज़र आपके स्क्रीन पर वह जानकारी दिखाता है।

उदाहरण के लिए – जब भी आप यूट्यूब ओपन करते हैं और यूट्यूब पर कोई वीडियो सर्च करते हैं तो वह रिक्वेस्ट सबसे पहले आपके ISP के सर्वर पर जाती है फिर ISP का सर्वर यूट्यूब के सर्वर से कनेक्ट होता है और यूट्यूब से वह वीडियो प्राप्त करके आपके कंप्यूटर पर दिखाता है और इस सारी प्रक्रिया के द्वारा हम यूट्यूब पर वीडियो देख पाते हैं।

अभी तक हम ने जाना की इंटरनेट क्या है(Internet kya hai) और इंटरनेट कैसे काम करता है अब हम इंटरनेट से जुडी कुछ जरुरी शब्दावली और इंटरनेट के तत्वों के बारे में जानेगे, जिनका हम यूज़ तो करते हैं पर हम उनके बारे में जानते नहीं हैं।

इंटरनेट से जुडी महत्वपूर्ण शब्दावली

अगर आप इंटरनेट का उपयोग करते हैं तो आपने बहुत सी चीजों के बारे में सुना होगा जैसे URL, HTTP/HTTPS, WWW, IP Address, Server और बहुत कुछ तो अब हम इनके बारे में जानेगे की ये क्या है और इनका क्या महत्व है।

WWW Kya Hai

जब भी हम कोई वेबसाइट ओपन करते हैं या ब्राउज़र पर किसी लिंक पर क्लिक करते हैं तो वह एक विंडो में उस वेबसाइट को ओपन कर देता है और और यदि आप सर्च बार में उस वेबसाइट का नाम देखेंगे तो आपको उसके नाम के पहले WWW लिखा मिलेगा जिसका पूरा नाम है वर्ल्ड वाइड वेब ( world wide web ), टेक्निकली यह एक इनफार्मेशन सिस्टम या डाटा का कलेक्शन होता है जिसे हम URL या किसी लिंक के जरिए एक्सेस कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए – इंटरनेट पर बहुत सारी वेबसाइट होती हैं और उन websites पर बहुत सारी फाइल्स, इमेजेज, वीडियोस, और डाटा स्टोर्ड होता है और उन सभी फाइल्स और वीडियोस को प्राप्त करने का लिंक WWW याने वर्ल्ड वाइड वेब में स्टोर्ड होता है, और उन फाइल्स और वीडियोस को एक्सेस करने के लिए हमें उसके लिंक की जरुरत होती है जिसे URL कहते हैं।

URL Kya Hai

जो भी वेबसाइट हम ब्राउज़र में ओपन करते हैं उसका एक यूनिक एड्रेस होता है जिसे हम URL कहते हैं। URL का पूरा नाम uniform resource locator है, जैसा की इसके नाम से ही पता चलता है की इसका काम वेब से रिसोर्सेज को लोकेट करना होता है क्युकी सारी जानकारी वर्ल्ड वाइड वेब में संग्रहित होती है।

HTTP/HTTPS Kya Hai

जब भी हम कोई वेबसाइट ओपन करते हैं तो हमें उसके URL के पहले HTTP या HTTPS लिखा मिलता है तो इन दोनों में क्या अंतर है और इनका क्या मतलब है?

HTTP का पूरा नाम hypertext transfer protocol है, इंटरनेट की दुनिया में, आसान शब्दों में transfer का मतलब होता है फाइल्स को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजना, और protocol का अर्थ होता है नियमों का समूह, जब भी आप कोई टेक्स्ट या फाइल भेजते हो या किसी और कंप्यूटर की जानकारी अपने कंप्यूटर से एक्सेस करते हो तो इस सारी प्रक्रिया में जानकारी एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर होती है जिसके लिए इंटरनेट पर कुछ नियम बनाये गए हैं जिन्हे protocol कहा जाता है।

उदाहरण के लिए आपने ये वेबसाइट ओपन की है और आप ये पोस्ट पढ़ रहे है तो आप इस वेबसाइट तक कैसे पहुंचे और आप इसकी जानकारी कैसे एक्सेस कर पा रहे हैं तो इस सारी प्रक्रिया के लिए इंटरनेट पर कुछ नियम बने हैं जो http के अंतर्गत आते हैं, और इन्ही नियमों के कारण आप इंटरनेट पर कोई भी जानकारी प्राप्त कर पाते हैं। कोई भी फाइल या जानकारी जो किसी ब्राउज़र या क्लाइंट या सर्वर के पास ट्रांसफर होती है वे सब इन्ही प्रोटोकॉल्स को फॉलो करती हैं।

मान लीजिए आपने ऑनलाइन इंटरनेट पर कोई फॉर्म फिल किया और सर्वर के पास सबमिट कर दिया तो इस प्रक्रिया में डाटा एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर हो रहा है और यदि आप HTTP प्रोटोकॉल का प्रयोग कर रहे हैं तो रस्ते में कोई कोई भी हैकर या चोर आपकी महत्वपूर्ण जानकारी को चुरा सकता है क्युकी आपकी फाइल या जानकारी का पाथ सुरच्छित नहीं है,

तो इस रास्ते को सुरच्छित करने के लिए https का प्रयाग किया जाता है जिसका पूरा नाम है hypertext transfer protocol secure, जिसका मतलब होता है की जो भी फाइल या डाटा आप भेज रहे हैं वो एक सुरच्छित पाथ के द्वारा ट्रांसफर हो रहा है और कोई भी हैकर उसे बीच में चुरा नहीं सकता।

इसीलिए हर बड़ी और विस्वसनीय कंपनी और बैंक्स की वेबसाइट के नाम के पहले हमेशा https लगा होता है जिसका मतलब होता है कि जो भी जानकारी या डाटा आप उनकी वेबसाइट पर भेजेंगे या सबमिट करंगे वह गोपनीय और सुरच्छित रहेगा और कोई भी उसे हैक नहीं कर पाएगा

अगर आप जानना चाहते है कि वेबसाइट गूगल पर कैसे रैंक करती हैं और गूगल के सबसे महत्वपूर्ण Google Ranking Factors क्या हैं तो लिंक पर क्लिक कर आप हमारा वह पोस्ट पढ़ सकते हैं।

इंटरनेट पर क्लाइंट और सर्वर क्या होता है

इंटरनेट की दुनिया में आपने इन दोनों शब्दों को कई बार सुना होगा पर क्या आप इनका सही अर्थ जानते हैं तो आइये हम इनको एक उदाहरण के द्वारा समझते हैं =>

मान लीजिये आप किसी मोबाइल की शॉप पर जाते हैं और दुकानदार से कोई मोबाइल दिखाने के लिए कहते हैं तो दुकानदार वह मोबाइल निकाल कर आपको दिखा देता है तो यहाँ आप जानकारी मांग रहे हैं तो आप उस दुकानदार के लिए क्लाइंट हुए और वह आपको जानकारी दे रहा है तो वह आपके लिए सर्वर(जानकारी प्रदान करने वाला) हुआ,

इसी तरह इंटरनेट पर जो किसी जानकारी की रिक्वेस्ट करता है वह क्लाइंट कहलाता है जैसे कि हम और जो उस रिक्वेस्ट या जानकारी के लिए रेस्पॉन्स करता है या अपने पास से प्रदान करता है सर्वर कहलाता है।

जैसे कि हम दुकानदार से मोबाइल मांग रहे हैं(रिक्वेस्ट कर रहे हैं ) तो हम क्लाइंट हुए और वो हमें (रेस्पॉन्स कर रहा है )मोबाइल (जानकारी ) प्रदान कर रहा है तो वह सर्वर (प्रदाता ) हुआ, इसी प्रकार इंटरनेट पर ब्राउज़र क्लाइंट होता है क्युकी हम किसी भी जानकारी के लिए ब्राउज़र के द्वारा रिक्वेस्ट भेजते हैं और जहां सारी जानकारी संग्रहित होती है और जहां से ब्राउज़र के पास भेजी जाती है वह सर्वर कहलाता है।

IP Address Kya Hota Hai

आपने IP Address के बारे में भी इंटरनेट पर कई बार सुना होगा, IP Address का पूरा नाम है internet protocol address, इंटरनेट की दुनिया में जो भी डिवाइस मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर कोई भी डिवाइस जो इंटरनेट से कनेक्ट होती है सबका अपना एक एड्रेस या ID होती है जिसे IP Address कहते हैं।

इसी IP Address की वजह से जब भी कोई इंटरनेट पर कोई रिक्वेस्ट भेजता है तो इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर जान पाता है कि रिक्वेस्ट किस लोकेशन, कंट्री, या डिवाइस से आ रही है, इसी प्रकार जब भी इंटरनेट पर किसी प्रकार का स्कैम/चोरी या फ्रॉड होता है तो पुलिस इसी IP Address के द्वारा चोर का पता लगाती है।

इसीलिए हर सिस्टम के लिए इंटनेट पर एक प्रोटोकॉल बनाया की जो भी डिवाइस इंटरनेट से कनेक्ट होगी उसे एक यूनिक IP Address दिया जाएगा ताकि यदि भविष्य में कोई फ्रॉड या स्कैम होता है तो उस IP Address के द्वारा उसका पता लगाया जा सके।

इंटरनेट की विशेषताएं

  • Accessibility(पहुँच) – इंटरनेट को एक्सेस करना बहुत ही आसान है आपके पास सिर्फ इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए और फिर आप कही से भी इंटरनेट का उपयोग कर सकते हो।
  • Easy to use – इंटरनेट यूज़ करने में बहुत ही आसान है आपके पास कोई भी डिवाइस हो मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर बस आपको आपका ब्राउज़र ओपन करना है और जो जानकारी आप चाहते हो वह डालना है और आपको उससे जुड़े परिणाम मिल जाएंगे।
  • काम कीमत – आज के समय में इंटरनेट बहुत ही सस्ता हो गया है इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां बहुत ही काम दामों में इंटरनेट सर्विस प्रदान कर रही हैं और इसके साथ वे अनलिमिटेड प्लान्स भी ऑफर कर रही हैं।
  • अन्य मीडिया के साथ इंटरेक्शन – इंटरनेट के द्वारा आप अन्य मीडिया वेबसाइट जैसे यूट्यूब के साथ जुड़ सकते हैं और अपनी पसंदीदा वीडियो और मनोरंजक चीजें देख सकते हैं।
  • पूरी दुनिया से संपर्क – इंटरनेट आपको पूरी दुनिया के साथ जोड़ता है आप इंटरनेट से पूरी दुनिया घूम सकते हैं और पूरी दुनिया के बारे में कोई भी न्यूज़ या जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  • अपडेटेड रहना – इंटरनेट आपको सारी दुनिया में हो रही गतिविधियों से अपडेट रखता है आज दुनिया में क्या हो रहा है अच्छा-बुरा, नए आविष्कार, और सब कुछ, सब की जानकारी आप इंटरनेट पर प्राप्त कर सकते हैं।

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इंटरनेट कनेक्शन के प्रकार(Types of internet connection in Hindi)

इंटरनेट कनेक्शन के मुख्यतः चार प्रकार होते हैं Dial-up connection, DSL, ADSL, and Broadband अब हम एक-एक करके इनके बारे में जानेंगे

Dial Up Connection

  • यह public switched telephone network(PSTN) की सुविधाओं का प्रयोग करता है।
  • इसमें टेलीफोन लाइन पर फ़ोन नंबर डायल करके इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर(ISP) से कनेक्शन स्थापित किया जाता है।
  • PSTN में टेलीफोन लाइन,फाइबर ऑप्टिक केबल्स, माइक्रोवेव ट्रांसमिशन लिंक्स, सेलुलर नेटवर्क्स, कम्युनिकेशन सेटेलाइट होते हैं।
  • Dial-up को टेलीफोन कनेक्शन स्थापित करने में टाइम लगता है (यह कई सेकण्ड्स तक हो सकता है और लोकेशन पर निर्भर करता है )
  • डाटा ट्रांसफर शुरू होने से पहले यह protocol synchronization के लिए कॉन्फिग्रेशन करता है
  • यह एक स्लो कनेक्शन है और मीडिया स्ट्रीमिंग के लिए उपयोगी नहीं है

DSL -Digital Subscriber Line

  • इसमें मॉडेम का यूज़ करके टेलीफोन लाइन्स के द्वारा डिजिटल डाटा ट्रांसमिट किया जाता है
  • इसमें इंटरनेट को एक्सेस करने के लिए सबसे आम तौर पर स्थपित की जाने वाली DSL टेक्नोलॉजी Asymmetric digital subscriber line (ADSL) का उपयोग किया जाता है।
  • DSL सर्विस तार वाली टेलीफोन सर्विस के साथ ही एक ही टेलीफोन लाइन पर प्रदान की जा सकती है।
  • ऐसा इसलिए संभव है क्युकी DSL DATA के लिए higher frequency bands का उपयोग करता है।
  • symmetric digital subscriber line (SDSL) services में डाउनस्ट्रीम और अपस्ट्रीम डाटा रेट्स बराबर होते हैं।

ISDN

  • इसका पूरा नाम Integrated services digital network (ISDN) है।
  • यह सार्वजनिक स्विच किए गए टेलीफोन नेटवर्क के पारंपरिक सर्किटों पर आवाज, वीडियो, डेटा और अन्य नेटवर्क सेवाओं के डिजिटल प्रसारण के लिए संचार मानकों का एक सेट है।
  • ISDN मानक कई तरह के एक्सेस इंटरफेस को परिभाषित करते हैं जैसे
    • बेसिक रेट इंटरफ़ेस (BRI )
    • प्राइमरी रेट इंटरफ़ेस (PRI )
    • नैरोबैंड ISDN (N-ISDN)
    • ब्रॉडबैंड ISDN (B-ISDN)

Broadband(ब्रॉडबैंड)

  • यह संचार की एक विधि है जो आवृत्तियों के एक विस्तृत बैंड का उपयोग करती है और प्रदान करती है।
  • किसी चैनल की बैंडविड्थ जितनी व्यापक (या चौड़ी) होती है, सूचना देने की क्षमता उतनी ही अधिक होती है।
  • यह Mbits / sec में गति प्रदान करने में सक्षम है।
  • ADSL ब्रॉडबैंड मुख्यतः घरों और ऑफिसों में यूज़ होते हैं।

निष्कर्ष

यहाँ हमने इंटरनेट के बारे में बहुत सी जरुरी बातें जानी जैसे internet kya hota hai(internet kya hai) और इंटरनेट कैसे काम करता है internet ke prakar और बहुत कुछ, इंटरनेट ने हमारे जीवन को तेज और आसान बना दिया है पर हमें कभी भी इंटरनेट का इस्तेमाल गलत कामों के लिए नहीं करना चाहिए और हमेशा सुरच्छित वेबसाइट ही विजिट करना चाहिए।

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