Operating System kya hai? Easy Simple & Complete Hindi Guide 2021

operating system kya hai

हम सभी अपने कंप्यूटर और मोबाइल में ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं, पर यदि कोई पूछे कि Operating System kya hai, तो हमारे लिए इसके बारे में विस्तार से समझा पाना मुश्किल हो जाएगा।

इसीलिए हम अपने इस पोस्ट में ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में शुरुवात से लेकर वर्तमान तक सब कुछ विस्तार से बताने वाले हैं कि operating system kya hai, operating system ke prakar, operating system ke karya, operating system ke components सब कुछ जो आप ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानना चाहते हैं।

अगर आपके मन में भी सवाल हैं कि operating system kya hai और ऑपरेटिंग सिस्टम से सम्बंधित अन्य सवाल, तो इस पोस्ट को अंत तक पढ़िए जिससे आपको ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़े सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे।

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Operating System kya hai(What Is An Operating System)

ऑपरेटिंग सिस्टम का अर्थ(Meaning Of Operating System)

ऑपरेटिंग सिस्टम एक प्रोग्राम है जो सभी एप्लीकेशन प्रोग्राम्स के एक्सिक्यूशन को नियंत्रित करता है, और कंप्यूटर के यूजर और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच एक इंटरफ़ेस की तरह बर्ताव करता है।

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ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर में हमेशा चलता रहता है (सामान्यतः उसे कर्नेल कहते हैं), बाकि सभी एप्लीकेशन प्रोग्राम होते हैं।

ऑपरेटिंग सिस्टम संसाधनों और सेवाओं के आवंटन से संबंधित है, जैसे कि मेमोरी, प्रोसेसर, डिवाइस। ऑपरेटिंग सिस्टम में इन संसाधनों को प्रबंधित करने के लिए प्रोग्राम शामिल हैं, जैसे कि शेड्यूलर, मेमोरी मैनेजमेंट, इनपुट/आउटपुट मैनेजमेंट और एक फाइल सिस्टम।

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सामान्य शब्दों में ऑपरेटिंग सिस्टम एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर में हमेशा चलता रहता है यह कंप्यूटर के लिए दिल की तरह काम करता रहता है, यह इंटरेक्शन के लिए इंटरफ़ेस उपलब्ध कराता है, और सभी प्रक्रियाओं और ऑपरेशन्स का प्रबंधन करता है जैसे – फाइल्स, मेमोरी, इनपुट/आउटपुट ऑपरेशन्स आदि।

क्या आप जानते हैं कि पॉडकास्ट क्या है और इसे कैसे बनाया जाता है और इससे क्या होता है जानने के लिए लिंक पर क्लिक करके आप हमारा वह पोस्ट पढ़ सकते हैं।

ऑपरेटिंग सिस्टम की परिभाषा(Definition Of Operating System)

“ऑपरेटिंग सिस्टम एक प्रोग्राम है जो कंप्यूटर के यूजर और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच एक मध्यस्थ की तरह काम करता है।”

“ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर का एक संग्रह है जो सिस्टम के संसाधनों का प्रबंधन और नियंत्रण करता है।”

“ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर प्रणाली के संसाधनों और गतिविधियों के प्रबंधन और साझाकरण के लिए जिम्मेदार है।”

“एक प्रोग्राम है जो कंप्यूटर में हमेशा चलता रहता है और कंप्यूटर को चालू करते ही अपने आप सक्रीय हो जाता है।”

क्या आप जानते हैं कि एंड्राइड फ़ोन रुट करना क्या होता है और इसके क्या फायदे और नुकसान हैं जानने के लिए लिंक पर क्लिक करके आप हमारा पोस्ट पढ़कर इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

कंप्यूटर सिस्टम की संरचना(Computer System Structure)

कंप्यूटर सिस्टम की संरचना को चार घटकों में बांटा गया है जो इस प्रकार है=>

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हार्डवेयर

ये बुनियादी कंप्यूटिंग संसाधन प्रदान करते हैं जैसे – CPU, मेमोरी, इनपुट/आउटपुट उपकरण।

ऑपरेटिंग सिस्टम

यह विभिन्न ऍप्लिकेशन्स और उपयोगकर्ताओं के बीच हार्डवेयर के उपयोग को समन्वित और नियंत्रित करता है।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग यूजर की किसी विशिष्ट समस्या को सुलझाने या किसी विशिष्ट कार्य के लिए किया जाता है जैसे – वर्ड प्रोसेसर, डेटाबेस सिस्टम, VLC मीडिया प्लेयर।

यूजर

उपयोगकर्ता के अंतर्गत यूजर, मशीन, और अन्य कंप्यूटर आते हैं।

क्या आप जानते हैं कि कॉल फॉरवार्डिंग क्या है और इसके क्या फायदे हैं जानने के लिए लिंक पर क्लिक करके आप हमारा कॉल फॉरवार्डिंग का पोस्ट पढ़ कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास(History Of Operating Systems)

  • पहले कंप्यूटर में कोई ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं था।
  • किसी भी प्रोग्राम को रन करने के लिए उसका पूरा कोड लिखना पड़ता था।

ऑपरेटिंग सिस्टम की पहली पीढ़ी(1940-50)

  • ये सामान्य गणित गणनाओं को हल करते थे।
  • वैक्यूम ट्यूब का उपयोग।
  • OS उपस्थित नहीं था।
  • मशीन भाषा (1,0)
  • पूरा कमरा भर जाता था।
  • प्लग बोर्ड का उपयोग।
  • पंच कार्ड का उपयोग।

कार्य

  • एक समय में एक प्रोग्राम को रन करते थे।

समस्याएं

  • समय की बर्बादी।
  • अत्यधिक महंगे।
  • प्रथम व अंतिम चरण के मध्य CPU निष्क्रिय रहता था।
  • स्लो प्रोसेसिंग।
  • कम संग्रहण छमता।
  • अत्यधिक गर्म होते थे।
  • बहुत बिजली लगती थी।

ऑपरेटिंग सिस्टम की दूसरी पीढ़ी(1950-65)

  • 1955 के आसपास ट्रांजिस्टर आये।
  • कंप्यूटर का आकर और लागत कम हो गई।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम डिज़ाइन किये गए।
  • असेम्ब्ली भाषा यूज़ की गई।
  • फोरट्रोन और कोबोल को उच्च-स्तरीय भाषा के रूप में प्रयोग किया गया।
  • प्रोग्रामर्स का कार्य सरल हो गया।
  • बेच सिस्टम का उपयोग।
  • साइंटिफिक और इंजीनियरिग गणनाएं की गई।
  • विश्वसनीय, शक्तिशाली हो गए।
  • असेम्ब्ली लैंग्वेज विकसित हो गई।
  • प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ गई।

ऑपरेटिंग सिस्टम की तीसरी पीढ़ी(1965-73)

  • इंटीग्रेटेड सर्किट्स का उपयोग किया गया।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम उपस्थित था।
  • उच्च-स्तरीय भाषा प्रयोग।
  • मल्टी-प्रोग्रामिंग।
  • मेमोरी पार्टीशन।
  • मिनी कंप्यूटर का विकास।
  • पीडीपी-1

ऑपरेटिंग सिस्टम की चौथी पीढ़ी(वर्तमान)

  • पर्सनल कप्म्यूटर विकसित हुए।
  • तीसरी पीढ़ी में विकसित मिनी कंप्यूटर के सामान विकास
  • 1975 में विंडोज OS आया।

अगर आपका कंप्यूटर या लैपटॉप स्लो चलता है या आप उसकी ख़राब परफॉरमेंस से परेशान हैं और अपने कंप्यूटर की स्पीड बढ़ाना चाहते हैं, तो आप हमारा पोस्ट कंप्यूटर की स्पीड कैसे बढ़ाएं सिस्टम को सुपरफास्ट कैसे बनायें पढ़ कर अपने कंप्यूटर को पहले जैसे फ़ास्ट बना सकते हैं।

1950 दशक के ऑपरेटिंग सिस्टम

  • 1956 में जनरल मोटर्स का GM-NAA I/O सिस्टम आया, NAA पहला ऑपरेटिंग सिस्टम था जो IBM 704 कंप्यूटर के लिए बनाया गया।
  • 1959 में GM-NAA I/O पर आधारित SHARE ऑपरेटिंग सिस्टम(SOS) आया।

1960 दशक के ऑपरेटिंग सिस्टम

  • 1961 में कम्पेटिबल टाइम शेयरिंग सिस्टम (CTSS) आया जो पहला टाइम शेयरिंग OS था, जिसे MIT कम्प्यूटेशन सेंटर द्वारा IBM 709 के लिए बनाया गया।
  • 1961 में ही B5000 सिस्टम के लिए मास्टर कण्ट्रोल प्रोग्राम(MCP) बना।
  • 1964 में IBM मेनफ्रेम के लिए IBM सिस्टम/360-बेच ऑपरेटिंग सिस्टम आया।
  • 1968 में मल्टी प्रोग्रामिंग सिस्टम आये जो मल्टी टास्किंग सपोर्ट करते थे।
  • 1969 में मल्टिक्स (मल्टिप्लैक्सड इनफार्मेशन एंड कंप्यूटिंग सर्विस) टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम आया जो सिंगल लेवल मेमोरी की कांसेप्ट पर आधारित था।
  • 1969 में UNIX अ फॅमिली ऑफ़ मल्टीटास्किंग, मल्टीयूज़र ऑपरेटिंग सिस्टम आया जिसे केन थॉम्सन डेनिस रिची, और अन्य द्वारा बेल लैब्स के अनुसंधान केंद्र में बनाया गया।

1970 दशक के ऑपरेटिंग सिस्टम

  • 1970 में डिजिटल PDP-11 मिनी कंप्यूटर के लिए डिजिटल एक्यूप्मेंट कारपोरेशन द्वारा DOS-11 बनाया गया।
  • 1972 में प्राइम कंप्यूटर ने अपने मिनी कंप्यूटर सिस्टम के लिए PRIMOS बनाया गया।
  • 1973 में Xerox Alto नाम का ऐसा पहला कंप्यूटर डिज़ाइन किया गया जो GUI पर आधारित OS को सपोर्ट करता था।
  • 1974 में Hewlett-Packard द्वारा एक मेनफ्रेम कंप्यूटर और मल्टी-प्रोग्रामिंग एक्सिक्यूटिव, रियल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया गया।
  • 1977 में बेल लैब्स में विकसित मूल यूनिक्स के स्रोत कोड के आधार पर बर्कले यूनिक्स विकसित किया गया। जिसे व्यापक रूप से वर्कस्टेशन, जैसे कि FreeBSD, OpenBSD, NetBSD, या DragonFly BSD, द्वारा अपनाया गया।

1970 दशक के बाद के ऑपरेटिंग सिस्टम

  • 1981 में x86 पर आधारित PC के लिए माइक्रोसॉफ्ट द्वारा MS-DOS ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया जिसकी IBM PC DOS के नाम से रिब्रांडिंग की गई।
  • 1984 में Apple Inc. द्वारा 1984 से 2001 तक Macintosh family of personal computers के लिए क्लासिक मैक OS बनाये गए, जो सिस्टम 1 से शुरू होकर Mac OS 9 पर बंद हुए।
  • 1985 में माइक्रोसॉफ्ट द्वारा एप्पल के जनवरी 1984 के मूल मैकिन्टोश के लिए विंडोज 1.0 लाया गया, जो ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (जीयूआई) के साथ पहला बड़े पैमाने पर उत्पादित पर्सनल कंप्यूटर का OS था।
  • 1987 में मिनीक्स (“मिनी-यूनिक्स”) एक माइक्रो-कर्नेल आर्किटेक्चर पर आधारित एक POSIX- अनुरूप यूनिक्स-जैसा ऑपरेटिंग सिस्टम बना।
  • 1990 विंडोज माइक्रोसॉफ्ट 3.0
  • 1991: GNU/Linux
  • 1993: विंडोज NT
  • 2001: मैक OS X
  • 2007: IOS
  • 2008: एंड्राइड OS

हम सब इंटरनेट का उपयोग करते हैं पर यदि कोई पूछे की इंटरनेट क्या है और कैसे काम करता है तो हम उसे नहीं समझा पाएंगे इसीलिए हमने इंटरनेट पर पूरा गाइड तैयार किया है और पोस्ट लिखा है, जिसे पढ़कर आप अपनी इंटरनेट के बारे में जानकारी को बढ़ा सकते हैं।

Operating System Ke Prakar(Types Of Operating Systems)

Operating System kya hai और इसके इतिहास को जानने के बाद आइये अब operating system ke prakar जानते हैं =>

  • बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Batch Operating System)
  • मल्टी-प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Multiprogramming Operating System)
  • मल्टी-टास्किंग/टाइम-शेयरिंग (Multitasking/Time-sharing Operating System)
  • रियल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Real-time Operating System)
  • डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम (Distributed Operating System)
  • क्लस्टर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम (Clustered Operating System)
  • एम्बेडेड ऑपरेटिंग सिस्टम (Embedded Operating System)

अब हम इनके बारे में एक-एक करके विस्तार से जानेंगे

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Batch Operating System)

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम 1960 के दशक में उपयोग किये जाते थे, बैच ऑपरेटिंग सिस्टम में अगर किसी को कुछ कंप्यूटिंग या प्रोसेस करनी होती थी तो वह अपनी जॉब को पंच कार्ड/मेग्नेटिक टेप में लोड करके कंप्यूटर ऑपरेटर को देता था, फिर ऑपरेटर एक तरह की जॉब के बैच बनाकर पंच कार्ड को कंप्यूटर में इन्सर्ट करता था, कंप्यूटर उन जॉब्स को एक्सेक्यूट करता था।

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम में कंप्यूटर जॉब्स को एक-एक करके एक्सेक्यूट करता था, और जॉब के कम्पलीट होने तक CPU बेकार रहता था और यही बैच ऑपरेटिंग सिस्टम का सबसे बड़ा नुकसान था।

मल्टी-प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Multiprogramming Operating System)

मल्टी-प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम में यूजर कई जॉब्स/प्रोसेस को एक साथ RAM में लोड करता है और CPU को देता है, फिर कंप्यूटर एक-एक करके उन जॉब्स को एक्सिक्यूट करता है। CPU एक जॉब को एक्सेक्यूट करता है और उसके कम्पलीट होने के बाद दूसरी जॉब को एक्सेक्यूट करता है और इसी तरह अन्य को।

मल्टी-प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम का फायदा यह था कि यदि पहली जॉब किसी फाइल को रीड करने या किसी I/O प्रोसेस के लिए जाती थी तो उस टाइम में CPU अगली जॉब को एक्सीक्यूट करने लगता था। इससे CPU बेकार नहीं रहता था जिससे CPU का सही तरह से यूज़ हो पाता था।

मल्टी-टास्किंग/टाइम-शेयरिंग (Multitasking/Time-sharing Operating System)

मल्टी-टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम को टाइम-शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है, मल्टी-टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम में CPU एक साथ कई जॉब्स को एक्सीक्यूट कर सकता है।

इस ऑपरेटिंग सिस्टम में CPU एक प्रोसेस को एक लिमिटेड टाइम पीरियड के लिए एक्सीक्यूट करता है और उसके बाद दूसरी जॉब को और इसी तरह अन्य को, इससे CPU अगली जॉब्स को रिस्पॉन्स कर पाता है, इसीलिए इसे टाइम-शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम में डेवेलपर्स द्वारा रिस्पॉन्स टाइम पर जोर दिया गया जिससे CPU का रिस्पॉन्स टाइम कम हो गया और यही इसका सबसे बाद फायदा था।

रियल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Real-time Operating System)

रियल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम(RTOS) एक ऐसा ऑपरेटिंग सिस्टम है जो डाटा को रियल टाइम में प्रोसेस करता है, इसमें जैसे ही CPU को डाटा दिया जाता है वह तुरंत ही डाटा को प्रोसेस कर देता है। रियल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग टाइम सेंसिटिव एप्लीकेशन और प्रोसेसेज में किया जाता है जैसे फ्लाइट, मिसाइल सिस्टम आदि।

डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम (Distributed Operating System)

डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम में यूजर अलग-अलग जिओलोकेशन पर अलग-अलग नॉड्स से एक नेटवर्क बनाता है यह स्वतंत्र, नेटवर्कयुक्त, संचार और शारीरिक रूप से अलग कम्प्यूटेशनल नोड्स के संग्रह का एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है।

यह ऑपरेटिंग सिस्टम विभिन्न CPUs द्वारा प्रोसेस की जाने वाली जॉब्स को संभालता है और यदि कोई नोड काम करना बंद कर देता है तो बाकि उसका लोड संभाल लेते हैं।

क्लस्टर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम (Clustered Operating System)

क्लस्टर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम भी डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह ही काम करता है बस दोनों में यही अंतर है कि क्लस्टर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम उन कम्प्यूटेशनल नॉड्स का संग्रह होता है जो लोकल नेटवर्क पर एक दूसरे से कनेक्टेड होते है। जैसे हम अपने ऑफिस में कम्प्यूटर्स का एक नेटवर्क बनाते हैं और उसे मुख्य कंप्यूटर से जोड़ देते हैं।

एम्बेडेड ऑपरेटिंग सिस्टम (Embedded Operating System)

एम्बेडेड ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा सिस्टम सॉफ्टवेयर होता है जिसे किसी डिवाइस के किसी विशिष्ट कार्य के लिए बनाया जाता है जैसे की माइक्रोवेव, फ्रिज आदि का सॉफ्टवेयर, इनके पास अपना एम्बेडेड ऑपरेटिंग सिस्टम होता है अगर उसे कोई दूसरा टास्क दिया जाए तो वो नहीं कर पाएंगे और ना ही इनके प्रोग्रामिंग में कोई परिवर्तन किया जा सकता है।

विश्व स्तर पर ऑपरेटिंग सिस्टम्स के मार्केट शेयर-जनवरी 2021

क्रमांक ऑपरेटिंग सिस्टम मार्केट शेयर
1एंड्राइड41.28%
2विंडोज31.6%
3IOS16.89%
4OS X7.01%
5अनजान1.31%
6लिनक्स0.8%
Data taken from gs.statcounter.com

अगर आप जानना चाहतें हैं कि जीमेल अकाउंट कैसे बनाये और उनको कैसे प्रयोग करें ये जानने के लिए आप लिंक पर क्लिक करके हमारा जीमेल वाला पोस्ट पढ़ सकते हैं।

ऑपरेटिंग सिस्टम के घटक/अंग(Components Of Operating System)

Operating system kya hai, operating system ke prakar और ऑपरेटिंग सिस्टम के इतिहास को जानने के बाद आइये अब ऑपरेटिंग सिस्टम के घटक/अंग/तत्व/अवयव के बारे में जानते हैं =>

  • प्रोसेस मैनेजमेंट
  • मैन-मेमोरी मैनेजमेंट
  • फाइल मैनेजमेंट
  • इनपुट/आउटपुट सिस्टम मैनेजमेंट
  • नेटवर्किंग
  • सेकंडरी-स्टोरेज मैनेजमेंट
  • प्रोटेक्शन सिस्टम
  • कमांड इन्टरप्रिटर सिस्टम

अब हम इनके बारे में एक-एक करके विस्तार से जानेंगे

प्रोसेस मैनेजमेंट

जो भी कार्य CPU द्वारा किया जाता है उसे प्रोसेस कहा जाता है, प्रक्रियाओं से सम्बंधित सभी कार्य प्रोसेस मैनेजमेंट के द्वारा संभाले जाते हैं जैसे- निर्माण, विलोपन, निलंबन, बहाली, प्रक्रिया संचार, तुल्यकालन, गतिरोध से निपटना, निर्धारण प्रक्रिया।

मैन-मेमोरी मैनेजमेंट

यह इस बात पर नजर रखता है कि मेमोरी का कौन सा भाग किसके द्वारा उपयोग किया जा रहा है, यह हमें यह जानने की सुविधा देता है कि कितनी मेमोरी फ्री है और कितनी किस प्रोसेस द्वारा उपयोग में ली जा रही है।

प्रोसेस के एक्सेक्यूशन के बाद मेमोरी को फ्री करना, यह निश्चित करना कि कौन सी प्रोसेस मेमोरी में लोड है मेमोरी स्पेस कब फ्री होगा, मेमोरी का आबंटन और पुनःआबंटन करना।

फाइल मैनेजमेंट

एक फाइल उसके निर्माता द्वारा परिभाषित जानकारियों का संग्रह होता है, कंप्यूटर फाइल्स को डिस्क(सेकंडरी स्टोरेज) पर स्टोर कर सकता है, जो एक दीर्घकालिक संग्रह उपलब्ध कराता है। यह फाइलों और डायरेक्ट्रीज का निर्माण और विलोपन करता है, स्टोरेज मीडिया पर फाइल्स का बैकअप बनाता है, फाइल्स सुरक्षा और फाइलों के बैकअप को बनाये रखने का काम करता है।

इनपुट/आउटपुट सिस्टम मैनेजमेंट

इनपुट/आउटपुट सिस्टम मैनेजमेंट ऑपरेटिंग सिस्टम का एक महत्पूर्ण अंग है, यह सभी इनपुट/आउटपुट हार्डवेयर को संभालता है।

नेटवर्किंग

नेटवर्किंग विभिन्न कम्प्यूटर्स को एक नेटवर्क में जोड़ने की एक तकनीक है यह कंप्यूटर यूजर को संसाधनों को साँझा करने और कम्प्यूटेशन की गति को बढ़ाने की सुविधा प्रदान करता है।

सेकंडरी-स्टोरेज मैनेजमेंट

इसकी निम्नलिखित गतिविधियां है =>

  • सेकंडरी-स्टोरेज पर उपलब्ध फ्री स्पेस का प्रबंधन करना।
  • नई फाइल के बनाये जाने पर मेमोरी का आबंटन करना।
  • मेमोरी को एक्सेस करने की रिक्वेस्ट्स की शेडूलिंग करना।

प्रोटेक्शन सिस्टम

यदि कंप्यूटर सिस्टम में कई उपयोगकर्ता हैं और यदि यह कई प्रक्रियाओं के समवर्ती निष्पादन की अनुमति दे रहा है, तो विभिन्न प्रक्रियाओं को एक-दूसरे की गतिविधियों से संरक्षित किया जाना चाहिए, और यह कार्य प्रोटेक्शन सिस्टम द्वारा किया जाता है।

कमांड इन्टरप्रिटर सिस्टम

कमांड इन्टरप्रिटर यूजर और ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच एक इंटरफ़ेस होता है, यूजर जो कमांड देता है OS उसे एक्सीक्यूट करता है। एक कमांड इन्टरप्रिटर का मुख्य कार्य उपयोगकर्ता-निर्दिष्ट कमांड को प्राप्त करना और निष्पादित करना है।

अगर आप जानना चाहते है घर बैठे किसी के कंप्यूटर कैसे एक्सेस किया जा सकता है या अपनी बड़ी फाइल को कैसे भेज सकते हैं तो आपको जानना चाहिए कि TeamViewer Kya Hai (What Is TeamViewer)? Yah Kaise Kam Karta Hai इसके लिए आप इस लिंक पर क्लिक करके हमारा यह पोस्ट पढ़ सकते हैं।

Operating System Ke Karya(Functions Of Operating System

अब तक हमने सीखा कि operating system kya hai और उसके इतिहास, घटकों के बारे में जाना आइये अब ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्यों के बारे में जानते हैं =>

  • यूजर के प्रोग्राम्स को कुशलतापूर्वक एक्सीक्यूट करना और यूजर की समस्याओं को हल करना आसान बनाना।
  • एन्ड यूजर के लिए कंप्यूटर सिस्टम यूज़ करना सुविधाजनक बनाना।
  • कंप्यूटर के हार्डवेयर और संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करना।
  • सेवाओं के साथ हस्तक्षेप किए बिना नए सिस्टम कार्यों के प्रभावी विकास, परीक्षण और परिचय की अनुमति देना।
  • यूजर इंटरफ़ेस उपलब्ध कराना।
  • हार्डवेयर संसाधनों का प्रबंधन करना।
  • कंप्यूटर को चालू और बंद करना।
  • सिस्टम डिवाइस को कॉन्फ़िगर करना।
  • कंप्यूटर मेमोरी का प्रबंधन करना।
  • कंप्यूटर सिस्टम में विभिन्न प्रक्रियाओं का समन्वय करना।
  • इंटरनेट कनेक्शन स्थापित करना और प्रबंधन करना।

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ऑपरेटिंग सिस्टम की विशेषताएँ(Features Of Operating System)

  • ग्राफ़िकल यूजर इंटरफ़ेस(GUI)
  • मल्टी-टास्किंग
  • मल्टी-प्रोसेसिंग
  • मल्टी-यूजर

हमने सीखा कि operating system kya hai आइये अब ऑपरेटिंग सिस्टम की विशेषताओं को जानते हैं =>

ग्राफ़िकल यूजर इंटरफ़ेस(GUI)

GUI(ग्राफ़िकल यूजर इंटरफ़ेस) ऑपरेटिंग सिस्टम में ग्राफ़िक्स और आइकॉन होते है जिन्हे सामान्यतः कंप्यूटर माउस द्वारा नेविगेट और नियंत्रित किया जाता है।

मल्टी-टास्किंग

  • ऑपरेटिंग सिस्टम एक ही समय पर कई सॉफ़्टवेयर और प्रक्रिया को चलाने की अनुमति देने में सक्षम है।
  • मल्टीटास्किंग CPU उपयोग और सिस्टम प्रदर्शन को बढ़ाता है।
  • इस युग के सबसे आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम मल्टीटास्किंग हैं।

मल्टी-प्रोसेसिंग

  • ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर सिस्टम में कई प्रोसेसर को सपोर्ट करने में सक्षम हैं।
  • एकल चिप पर कई प्रोसेसर सिस्टम के प्रदर्शन को बढ़ाते हैं।
  • डुअल-कोर, क्वाड-कोर, ऑक्टा-कोर और हेक्सा-कोर प्रोसेसर उपलब्ध हैं।

मल्टी-यूजर

ऑपरेटिंग सिस्टम कई उपयोगकर्ताओं को एक दूसरे की सेवाओं को डिस्टर्ब किए बिना एक ही कंप्यूटर सिस्टम का उपयोग करने की अनुमति देता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम के लक्षण(Characteristics Of Operating System)

यहाँ हम ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ लक्षण बताने जस रहे हैं =>

  • यूजर फ्रेंडली
  • सिस्टम के प्रत्येक संशाधन की स्थिति को ट्रैक करना।
  • सिस्टम के संसाधनों जैसे सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर को शेयर करने की अनुमति प्रदान करना।
  • मजबूत सुरक्षा सुविधाएं प्रदान करना।
  • उपयोग करने में सुविधाजनक होना।

अगर आप गूगल को बहुत ही साधारण तरीके से उपयोग करते हैं तो आपको जरूर जानना चाहिए की गूगल पर सर्च कैसे करे 17 बेस्ट गूगल सर्च ट्रिक्स इन हिंदी लिंक पर क्लिक करके आप हमारा वह पोस्ट पढ़ सकते हैं।

कर्नेल क्या है(What Is A Kernel)

अगर आप कंप्यूटर या स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं तो आपने कर्नेल के बारे में जरूर सुना होगा, हमने भी अपने इस पोस्ट में कर्नेल का 2-3 बार जिक्र किया है तो हो सकता है कि आप जानना चाहते हों कि कर्नेल क्या है, तो आइये इस प्रश्न का उत्तर जानते हैं =>

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कर्नेल ऑपरेटिंग सिस्टम का मुख्य/केंद्रीय भाग होता है जो हार्डवेयर और एप्लीकेशन के मध्य एक पुल की तरह काम करता है और सभी प्रोग्राम एवं प्रक्रियाओं को प्रबंधित और अधिकृत करता है।

कोई भी डिवाइस चाहे वह एंड्राइड, IOS या कंप्यूटर हो सभी ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं जिनका एक कर्नेल होता है, अगर आप अपने फ़ोन से फोटो खींचना चाहते हो तो उस एप्लीकेशन को आपके फ़ोन में फोटो खींचने और स्टोर करने के लिए कैमरे, फ़्लैश-लाइट, और स्टोरेज मेमोरी को एक्सेस करने की जरुरत होगी।

तो कर्नेल इन सभी कार्यों को प्रबंधित करता है और सिस्टम हार्डवेयर तक पहुंचने के लिए एप्लिकेशन को अनुमति देता है, यह मेमोरी प्रबंधन, आवंटन, पुनःआबंटन और इस तरह के अन्य सभी कार्यों को करता है।

अगर आप इंटरनेट पर अपनी सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंतित है और अपने कनेक्शन को प्राइवेट बनाना चाहते है तो आप VPN Kya Hota Hai? VPN Kaise Use Kare No.1 Free Hindi Guide इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

32-Bit VS 64-Bit ऑपरेटिंग सिस्टम

मेमोरी साइज के अनुसार दो तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध हैं पर उनमे अंतर समझने से पहले हमें समझना होगा कि बिट क्या है(What Is Bit)

बिट क्या है(What Is Bit)

कंप्यूटर बाइनरी भाषा (1,0) को समझता है और सभी रिकार्ड्स को इसी (1,0) के फॉर्म में रखता है बिट कंप्यूटर के संग्रहण छमता मापन की सबसे छोटी इकाई है जो यह बताती है किसी किसी डिवाइस पर कितना डाटा स्टोर किया जा सकता है।

बिट मेमोरी का सबसे छोटा रूप है 1 बिट का अर्थ होता है कि डिवाइस सिर्फ एक शब्द को स्टोर कर सकती है जैसे-जैसे बिट बढ़ती जाती है डिवाइस की संग्रहण छमता बढ़ती जाती है जैसा की इमेज में दिखाया गया है।

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अब हम जान चुके हैं कि बिट क्या है तो आइये अब जानते हैं कि 32-Bit और 64-Bit ऑपरेटिंग सिस्टम में क्या अंतर है =>

32-Bit VS 64-Bit ऑपरेटिंग सिस्टम

क्रमांक कार्य 32-Bit ऑपरेटिंग सिस्टम64-Bit ऑपरेटिंग सिस्टम
1इंस्टालेशन32-Bit OS को 32-Bit और 64-Bit दोनों ही प्रोसेसर्स पर इनस्टॉल किया जा सकता है।64-Bit OS को सिर्फ 64-Bit प्रोसेसर पर ही इनस्टॉल किया जा सकता है।
2स्टोरेजइसमें सिर्फ 4 GB डाटा स्टोर किया जा सकता है।इसमें 16 EB(Exabyte) तक डाटा स्टोर किया जा सकता है।
3RAM32-Bit OS में अधिकतम 4 GB की RAM लगाई जा सकती है।64-Bit OS में 16 EB(Exabyte) तक की RAM लगाई जा सकती है।
4मेमोरी यूज़अगर आप 32-bit ऑपरेटिंग सिस्टम में 4 GB से ज्यादा RAM लगाते हैं तब भी वह सिर्फ 4 GB तक की ही RAM का उपयोग करेगा और बाकि बेकार रहेगी।अगर आप 64-Bit ऑपरेटिंग सिस्टम में 16 EB(Exabyte) तक की भी RAM लगाते हैं तो भी वह आपके सिस्टम की पूरी RAM को जरुरत के अनुसार उपयोग करेगा जिससे आपके सिस्टम की परफॉरमेंस और अच्छी हो जाएगी।
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हमने 32-bit OS और 64-bit OS के बीच के अंतर को जाना जिससे यह पता चलता है कि 32-bit OS की सीमित मेमोरी के कारण मेमोरी की समस्या को दूर करने के लिए 64-bit प्रोसेसर बने और उनके लिए 64-bit ऑपरेटिंग सिस्टम बनाये गए।

अंतिम शब्द

यहाँ हमने ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में सब कुछ जाना जैसे operating system kya hai, operating system ke prakar, operating system ke karya और भी अन्य, अगर आपको हमारा यह पोस्ट अच्छा लगा हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताये और इसी तरह की टेक्नोलॉजी और ब्लॉगिंग से जुडी जानकारियों को प्राप्त करने के लिए हमारे अन्य पोस्ट भी पढ़ें।

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