Computer Virus Kya Hai Complete Free Hindi Guide 2021

Computer Virus Kya Hai

नमस्कार मित्रों, मेरा नाम आनंद पटेल है, और आज हम कंप्यूटर वायरस के बारे में बात करने वाले हैं कि Computer Virus Kya Hai, कंप्यूटर वायरस के प्रकार, कम्प्यूटर वायरस से बचने के उपाय क्या हैं, और वो सब कुछ जो आप कंप्यूटर वायरस के बारे में जानना चाहते हैं।

अगर आप मोबाइल, लैपटॉप, या कंप्यूटर का उपयोग करते हैं तो आपने कभी ना कभी सिस्टम की धीमी गति, करप्ट फाइल्स, सिस्टम हेंग, सॉफ्टवेयर क्रेश और इसी तरह की कई अन्य समस्याओं का सामना किया होगा और इन सभी समस्याओं का कारण आपके सिस्टम में मौजूद वायरस हो सकते हैं।

कंप्यूटर वायरस क्या हैवायरस एक दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर या प्रोग्राम हैं जो जानबूझकर डेवलपर्स, प्रोग्रामर, या हैकर्स द्वारा उपयोगकर्ता के डेटा को दूषित करने या अपने कंप्यूटर या अन्य उपकरणों से उपयोगकर्ता की जानकारी चोरी करने के लिए विकसित किए जाते हैं।

अगर आप इस पोस्ट को पढ़ रहे हैं तो इसका मतलब है कि आपके मन में भी कंप्यूटर वायरस से जुड़े सवाल हैं जैसे computer virus kya hai, computer virus ke prakar, कम्प्यूटर वायरस से बचने के उपाय क्या हैं, तो इस पोस्ट को अंत तक पढ़ें और आपको कंप्यूटर वायरस से जुड़ी पूरी जानकारी मिल जाएगी।

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मैलवेयर क्या है(malware kya hai)

मैलवेयर की परिभाषा और अर्थ (Malware Definition And Meaning)

मैलवेयर दुर्भावनापूर्ण(malicious) सॉफ्टवेयर होते हैं, ये वो कंप्यूटर प्रोग्राम होते है जो उपयोगकर्ता की सहमति या जानकारी के बिना उसकी फाइल्स को करप्ट करने और कंप्यूटर को ख़राब करने के लिए डिज़ाइन किये जाते हैं।

मैलवेयर का पूरा अर्थ मैलिसियस सॉफ्टवेयर(malware ka full form malicious software)होता है, मैलवेयर एक सामान्य शब्द है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के खतरों को कवर करने के लिए किया जाता है जो आपकी फ़ाइलों को दूषित करते हैं या कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाते हैं जैसे वायरस, स्पाईवेयर, ट्रोजन, वर्म्स, रूटकिट्स, और इसी तरह अन्य।

ये दुर्भावनापूर्ण प्रोग्राम विभिन्न प्रकार के कार्य कर सकते हैं जैसे कि जानकारी चुराना, महत्वपूर्ण डेटा को एन्क्रिप्ट या डिलीट करना, कोर कंप्यूटिंग कार्यों को हाईजैक करना और किसी उपयोगकर्ता की कंप्यूटर गतिविधि को उसकी अनुमति के बिना मॉनिटर करना।

मैलवेयर हमारे कंप्यूटर रूप में गलत और भ्रष्ट फ़ाइलों, स्पैम ईमेल, असुरक्षित और दुर्भावनापूर्ण वेबसाइटों से जानकारी और फाइल्स डाउनलोड करने से आता है।

मैलवेयर के प्रकार(Types Of Malware In Hindi)

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  • वायरस (Virus)
  • वर्म्स (Worms)
  • ट्रोजन हॉर्स (Trojan horse)
  • रैनसमवेयर (Ransomware)
  • स्पाईवेयर (Spyware)
  • एडवेयर (Adware)

अब हम मैलवेयर के सभी प्रकारों के बारे में एक-एक करके विस्तार से जानेंगे =>

अगर आप इंटरनेट पर अपनी सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंतित है और अपने कनेक्शन को प्राइवेट बनाना चाहते है तो आप VPN Kya Hota Hai? VPN Kaise Use Kare No.1 Free Hindi Guide इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

कंप्यूटर वायरस क्या है(Computer Virus Kya Hai)

कंप्यूटर वायरस का अर्थ(Meaning Of Computer Virus)

वायरस का पूरा नाम वाइटल इनफार्मेशन रिसोर्स अंडर सीज (full name of the virus is Vital Information Resource Under Siege) होता है, कंप्यूटर वायरस एक ऐसा प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर होता है जिसको प्रोग्रामर/डेवलपर/हैकर द्वारा फाइलों और कंप्यूटर को करप्ट, ख़राब करने और डाटा और जानकारी को चुराने के लिए डेवेलोप किया जाता है।

प्रोग्रामर या हैकर इस तरह के प्रोग्राम बनाते हैं और उन्हें वेबसाइट, ईमेल, लिंक्स और दूसरे सॉफ्टवेयर के माध्यम से इंटरनेट पर फैला देते हैं और जैसे ही यूजर एक बार उन लिंक्स पर क्लिक करता है या जाने-अनजाने या किसी और सॉफ्टवेयर या फाइलों के साथ उन प्रोग्राम्स को डाउनलोड और इनस्टॉल कर लेता है, वैसे वायरस यूजर के सिस्टम में आ जाते हैं।

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उसके बाद ये वायरस हमारे कंप्यूटर, फाइलों, और प्रोग्राम्स को करप्ट और ख़राब करना शुरू कर देते हैं वायरस हमारी फाइलों की डुप्लीकेट कॉपी बना सकते हैं, डिलीट कर सकते हैं, उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर मूव कर सकते हैं, सिस्टम को स्लो बना सकते हैं, हेंग कर सकते हैं, हार्ड ड्राइव को क्रेश कर सकते हैं, महत्वपूर्ण जानकारी को हैकर्स तक पंहुचा सकते हैं।

कंप्यूटर वायरस की परिभाषा(Definition Of Computer Virus)

कंप्यूटर वायरस क्या है(Computer Virus Kya Hai)


“वायरस दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर या प्रोग्राम हैं जो जानबूझकर डेवलपर्स, प्रोग्रामर, या हैकर्स द्वारा उपयोगकर्ता के डेटा को दूषित करने के लिए या अपने कंप्यूटर या अन्य उपकरणों से उपयोगकर्ता की जानकारी चोरी करने के लिए विकसित किए जाते हैं।”


“एक कंप्यूटर वायरस एक प्रकार का दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर है, जिसे निष्पादित करते समय, अन्य कंप्यूटर प्रोग्रामों को संशोधित करके और अपना कोड डालकर खुद को दोहराता है। जब प्रतिकृति सफल हो जाती है, तो प्रभावित क्षेत्रों को कंप्यूटर वायरस से संक्रमित होने के लिए कहा जाता है।”

इंटरनेट नेटवर्क पर फैलने वाला पहला वायरस क्रीपर(Creeper) था जिसे रोबर्ट थॉमस ने 1971 में बनाया था। क्रीपर कंप्यूटर या उसकी फाइलों को नुकसान नहीं पहुँचाता था पर लोगो को काम करने में दखल देता था, परेशान करता था, जैसे ही लोग कंप्यूटर पर काम करना शुरू करते थे उन्हें बार-बार कंप्यूटर स्क्रीन पर एक पॉप-अप मैसेज आता था “मैं क्रीपर हूँ पकड़ सको तो पकड़ो”(“I am Creeper catch me if you can”)

उस समय इसे एक मजाकिया सॉफ्टवेयर(prank software) कहा गया पर जैसे-जैसे समय बीतता गया, ऐसे बहुत से मालिसियस सॉफ्टवेयर इंटरनेट पर आ गए और फिर इन्हे वायरस का नाम दिया गया।

कंप्यूटर पर फैलने वाला पहला वायरस ELK CLONER VIRUS था जिसे rich skrenta द्वारा 1982 में बनाया गया था। ELK क्लोनर वायरस को Apple II(DOS 3.3) OS के लिए बनाया गया था।

ELK क्लोनर वायरस को फ्लॉपी डिस्क में स्टोर किया जाता था और कंप्यूटर के बूट सेक्टर को इन्फेक्ट करने के लिए उपयोग किया जाता था।

अगर आप गूगल को बहुत ही साधारण तरीके से उपयोग करते हैं तो आपको जरूर जानना चाहिए की गूगल पर सर्च कैसे करे 17 बेस्ट गूगल सर्च ट्रिक्स इन हिंदी लिंक पर क्लिक करके आप हमारा वह पोस्ट पढ़ सकते हैं।

कंप्यूटर वायरस के प्रकार(Types Of Computer Virus In Hindi)

अब तक हमने जाना कि कंप्यूटर वायरस क्या है(Computer Virus Kya Hai) आइये अब कम्प्यूटर वायरस के प्रकार जानते हैं =>

  • बूट रिकॉर्ड वायरस(Boot Record Virus) – इस तरह के वायरस कंप्यूटर के बूट सेक्टर में स्टोर होते हैं और जैसे ही हम अपने कंप्यूटर को स्टार्ट करते हैं बूट रिकॉर्ड वायरस अपने आप एक्टिव हो जाते हैं और हमारे कंप्यूटर की स्पीड और बूटिंग प्रोसेस को स्लो कर देते हैं। इस तरह के वायरस को कंप्यूटर से रिमूव करने के लिए हमें कंप्यूटर को फॉर्मेट करना पड़ता है।
  • डायरेक्ट एक्शन वायरस(Direct Action Virus) – इस तरह के वायरस इंटरनेट से डायरेक्टली हमारे कंप्यूटर में इनस्टॉल हो जाते हैं और हमारी फाइलों को डिलीट करना, कंप्यूटर को बार-बार रीस्टार्ट करना शुरू कर देते हैं, ये इंटरनेट के ड्राइवर्स को डिलीट करके इंटरनेट के चालू होने में भी बाधा उत्पन्न करते हैं और इसी तरह के अन्य काम करते रहते हैं।
  • मल्टीपरटाइट वायरस(Multipartite Virus) – इस तरह के वायरस अपने आप कंप्यूटर के प्रोग्राम्स को चालू कर देते हैं और फाइल्स को ओपन कर देते हैं, ये सिस्टम के बूट सेक्टर को नुकसान पहुंचते हैं और कभी-कभी कंप्यूटर को क्रेश भी कर देते हैं।
  • पोलीमॉर्फिक वायरस(Polymorphic Virus) – इस तरह के वायरस अलग-अलग फ़ोल्डर्स में अलग-अलग नामों से अपनी बहुत सी कॉपी बनाते हैं और कंप्यूटर की मेमोरी को अपनी डुप्लीकेट फाइल्स से भर देते हैं जिससे कंप्यूटर की मेमोरी भर जाती है और कंप्यूटर हैंग करने लगता है।
  • ओवरराईट वायरस(Overwrite Virus) – ये वायरस ओरिजिनल फाइल्स के डाटा को डिलीट कर देते हैं और उन्हें दूसरे करप्टेड डाटा से ओवरराईट कर देते हैं जिससे जब भी आप उन फाइल्स को ओपन करते हो तो आपको उनमे ओरिजिनल डाटा नहीं मिलता।
  • फाइल इंफेक्टर वायरस(File Infector Virus) – इस तरह के वायरस फाइल्स के डाटा को ओवरराईट नहीं करते बल्कि पूरी फाइल को ही डिलीट कर देते हैं और उसकी जगह पर दूसरी खाली फाइल्स बना देते हैं जिससे जब भी आप उन फाइलों को ओपन करते हैं तो आपको कोई डाटा नहीं मिलता।
  • मेक्रो वायरस (Macro Virus) – मेक्रो MS ऑफिस का एक फंक्शन है जिसमे हम फाइल्स बनाकर सेव कर सकते हैं मेक्रो वायरस MS ऑफिस की फाइलों पर अटैक करता है।
  • रेसिडेंट वायरस(Resident Virus) – ये वायरस अपनी दो कॉपी बनाता है और REM मेमोरी में अलग-अलग जगह स्टोर करता है इसीलिए एंटीवायरस के लिए इन्हे डिटेक्ट कर पाना मुश्किल हो जाता है और यदि इसकी एक फाइल एंटीवायरस द्वारा डिटेक्ट कर ली जाती है तो ये फिर से एक और नई फाइल बनाकर उसे REM मेमोरी में दूसरी लोकेशन में स्टोर कर देता है और इस तरह यह कंप्यूटर का रेसिडेंट बन जाता है इसीलिए इसे रेसिडेंट वायरस कहा जाता है।
  • रूटकिट वायरस(Rootkit Virus) – यह एक बहुत ही खतरनाक वायरस है जब भी कोई किसी इल्लीगल या असुरच्छित वेबसाइट से कोई फाइल या सॉफ्टवेयर डाउनलोड करता है तो यह वायरस अपने आप उस सॉफ्टवेयर या फाइल के साथ यूजर के कंप्यूटर में इनस्टॉल हो जाता है। रूटकिट वायरस हैकर्स के लिए बैकडोर्स और लूपहोल्स बनाते हैं जिससे हैकर्स आसानी से यूजर के कंप्यूटर को हैक कर सकते हैं और जानकारी चुरा सकते हैं।

कंप्यूटर वायरस के लक्षण/प्रभाव(Symptoms Of Computer Virus)

अब तक हमने जाना कि कंप्यूटर वायरस क्या है(Computer Virus Kya Hai) और कंप्यूटर वायरस के प्रकार समझे, पर आप उनको कैसे पहचानेंगे या केंसे जानेंगे कि आपका कंप्यूटर वायरस से इन्फेक्टेड है यहाँ हम आपको वायरस के कुछ लक्षण/प्रभाव बताने जा रहे हैं जो इशारा करते हैं कि आपका कंप्यूटर वायरस से संक्रमित है =>

  • सिस्टम परफॉरमेंस(System performance) – जब वायरस कंप्यूटर पर हमला करते हैं और उसकी फाइलों को करप्ट कर देते हैं तो कंप्यूटर स्लो हो जाता है और कंप्यूटर की स्लो परफॉरमेंस इस बात का इशारा होती है कि आपका कंप्यूटर वायरस से इन्फेक्टेड हो सकता है।
  • स्क्रीन पर पॉप-अप आना – अगर आपकी कंप्यूटर स्क्रीन पर बिना किसी वेबसाइट या एप की पॉप-अप को allow किये बार-बार पॉप-अप्स दिखाई दे रहे हैं तो ये सब वायरस के कारण हो सकता है।
  • फाइलों की कॉपीस – अगर आपको आपकी फाइलों की अलग-अलग कॉपीस कई फ़ोल्डर्स में दिखाई देती हैं जो की आपने नहीं बनाई तो ये वायरस का काम हो सकता है।
  • प्रोग्राम्स का अपने आप शुरू होना – अगर आपके बिना चालू किये ही कंप्यूटर के प्रोग्राम अपने आप रन होने लगते हैं तो ये सब वायरस का काम हो सकता है।
  • फाइल का ओपन ना होना या ना मिलना – आपके कंप्यूटर में सेव्ड कोई फाइल ओपन नहीं हो रही या मिल नहीं रही और आपने उस फाइल को डिलीट नहीं किया, तो यह वायरस की वजह से हो सकता है।
  • हार्ड डिस्क से आवाज आना – सामान्यतः हमारे कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव से कोई आवाज नहीं आती पर यदि हमारे कंप्यूटर पर खतरनाक वायरस हमला करते हैं तो कभी कभी हमारे कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव आवाज करती है और यह वायरस के होने का एक इंडिकेशन होता है।

यहाँ हमने जाना कि कंप्यूटर वायरस क्या है(Computer Virus Kya Hai) और कंप्यूटर वायरस के प्रकार समझे, अब हम मैलवेयर के अन्य प्रकारों के बारे में समझते हैं =>

अगर आप जानना चाहते है घर बैठे किसी के कंप्यूटर कैसे एक्सेस किया जा सकता है या अपनी बड़ी फाइल को कैसे भेज सकते हैं तो आपको जानना चाहिए कि TeamViewer Kya Hai (What Is TeamViewer)? Yah Kaise Kam Karta Hai इसके लिए आप इस लिंक पर क्लिक करके हमारा यह पोस्ट पढ़ सकते हैं।

वर्म्स(Worms)

कंप्यूटर वर्म क्या है(What Is a Computer Worm)

अगर आप वर्म्स का अर्थ उन छोटे कृमि(केंचुओं) को समझ रहे हो जिनका प्रयोग हम मछली पकड़ने के लिए चारे के रूप में करते हैं तो वो वर्म्स नुकसानदायक नहीं होते पर यहाँ हम कंप्यूटर वर्म्स की बात कर रहे हैं जो की बहुत खतरनाक होते हैं। वर्म्स वायरस की तरह विनाशकारी तो नहीं होते पर कंप्यूटर वायरस जितने ही खतरनाक होते हैं।

वर्म्स की परिभाषा(Worm Definition)

“कंप्यूटर के कीड़े(Worms) छोटे प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर होते हैं जो खुद की बहुत सारी प्रतियां बनाते हैं, वर्म्स किसी विशेष कंप्यूटर को लक्षित नहीं करते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य कंप्यूटर के पूरे नेटवर्क को संक्रमित करना होता है।”

एक कंप्यूटर वर्म एक छोटा, स्वतंत्र और दुर्भावनापूर्ण(malicious) प्रोग्राम होता है जिसे ना किसी होस्ट फाइल की जरुरत होती है और ना ही काम करने के लिए किसी के आदेश की। कंप्यूटर वर्म अपने आप अपनी बहुत सारी कॉपी बनाता है और पूरे कंप्यूटर नेटवर्क जैसे फाइल्स, फ़ोल्डर्स, एड्रेस, इमेल्स और अन्य सभी जगह फैला देता है।

और जब हम अपने कंप्यूटर में कोई दूसरी डिवाइस जैसे पेन ड्राइव, DVD या कोई और डिवाइस कनेक्ट करते हैं तो वह शेयर की जा रही फाइल्स के साथ अपनी भी कॉपी बनाकर उनमे भी फ़ैल जाता है और जब वो डिवाइस किसी दूसरे कंप्यूटर में कनेक्ट की जाती है तो यह उन डिवाइसों से अन्य कंप्यूटर में फ़ैल जाते हैं।

अधिकांश कीड़े(Worms) सिस्टम में घुसपैठ करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं, जबकि बहुत कम वर्म्स सिस्टम सेटिंग्स को बदलने की कोशिश करते हैं, भले ही वे ऐसा न करें लेकिन वे अभी भी बहुत खतरनाक हैं क्योंकि वे बहुत सारे बैंडविड्थ और अन्य मूल्यवान संसाधनों को लेते हैं।

वायरस और वर्म्स में अंतर(Worm VS Virus)

कंप्यूटर वायरस और कंप्यूटर वर्म्स दोनों ही मैलवेयर के प्रकार हैं पर दोनों एक नहीं हैं दोनों में कुछ अंतर हैं जैसे =>

  • परिभाषों के आधार पर वायरस किसी निश्चित कंप्यूटर पर टारगेट करते हैं जबकि वर्म्स अपने बॉटनेट्स(botnets) बनाने के लिए पूरे कंप्यूटर नेटवर्क को टारगेट करते हैं।
  • कंप्यूटर वायरस किसी ना किसी आधिकारिक प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर के साथ जुड़े होते हैं जबकि वर्म्स को किसी होस्ट फाइल की जरुरत नहीं होती ये स्वतंत्र रूप से फैलते रहते हैं।

कंप्यूटर वर्म का उदाहरण(Example Of The Computer Worm)

वर्म का एक प्रसिद्द उदाहरण है I love you worm, लव वर्म को लव बग या लव लेटर वर्म के नाम से भी जाना जाता है यह एक कंप्यूटर वर्म था जिसने मई 2000 में 10 लाख से ज्यादा पर्सनल कम्प्यूटर्स को संक्रमित कर दिया था, यह एक ईमेल मैसेज से शुरू हुआ था जिसका सब्जेक्ट होता था I love you, और उसके साथ एक फाइल love letter for you.DXD.VBS के नाम से अटैच होती थी।

अटेचमेंट को ओपन करते ही लव वर्म की बेसिक स्क्रिप्ट एक्टिवेट हो जाती थी और वह कंप्यूटर की हर फाइल को इन्फेक्ट करना शुरू कर देता था, वह अपनी कॉपियां बनाकर माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक द्वारा प्रयोग की जाने वाली विंडोज की एड्रेस बुक के जरिये सभी एड्रेस पर अपनी कॉपी भेज देता था, इसलिए यह इसके पहले फैलने वाले किसी भी ईमेल वर्म की तुलना में सबसे ज्यादा तेजी से फैला।

अगर आप जानना चाहतें हैं कि जीमेल अकाउंट कैसे बनाये और उनको कैसे प्रयोग करें ये जानने के लिए आप लिंक पर क्लिक करके हमारा जीमेल वाला पोस्ट पढ़ सकते हैं।

ट्रोजन हॉर्स क्या है (Trojan Horse In Computer)

ट्रोजन हॉर्स का अर्थ(Trojan Horse Meaning)

ट्रोजन हॉर्स मैलवेयर का एक प्रकार है और यह बहुत ही खतरनाक और विध्वंसक मैलवेयर है, एक बार अगर यह आपके कंप्यूटर में इनस्टॉल हो गया तो फिर ये आपकी फाइल्स को डिलीट, रिमूव कर सकता है, फाइल्स और प्रोग्राम्स की डुप्लीकेट कॉपी बना सकता है, C ड्राइव को फॉर्मेट कर सकता है, हार्ड ड्राइव को करप्ट कर सकता है और पूरे सिस्टम को डैमेज कर सकता है जिससे कंप्यूटर काम करना बंद कर देता है।

ट्रोजन हॉर्स की परिभाषा(Trojan Horse Definition)

“ट्रोजन हॉर्स एक नकली दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर है, जो अवैध और असुरक्षित वेबसाइट से कंप्यूटर में आता है, यह कंप्यूटर से फ़ाइलों को हटा सकता है, प्रारूपित कर सकता है और हमारे सिस्टम को पूरी तरह से नुकसान पहुंचा सकता है।”

जब भी कोई किसी अवैध, असुरक्षित या मालिसियस वेबसाइट को ओपन करता है तब उसे कुछ पॉप-अप्स दिखाई देते हैं जैसे – “आपके कंप्यूटर में बहुत ही खतरनाक वायरस है उन्हें हटाने की लिए इस सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करें”, “50000$ आपका इंतजार कर रहें हैं पाने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें”, और इसी तरह के बहुत से अन्य।

एक बार जब यूजर इन लिंक्स पर क्लिक करता हैं तो एक फेक सॉफ्टवेयर उनके सिस्टम में डाउनलोड हो जाता है जो दिखता एक सॉफ्टवेयर के जैसा है पर वो होता है ट्रोजन हॉर्स, और एक बार ट्रोजन हॉर्स कंप्यूटर में इनस्टॉल हो गया तो फिर बर्बादी का सिलसिला शुरू हो जाता है और यह पूरे सिस्टम को ख़राब कर देता है जिससे कंप्यूटर काम करना बंद कर देता है।

रैनसमवेयर (Ransomware)

कंप्यूटर पर रैनसमवेयर क्या है(What is ransomware on the computer)

रैनसमवेयर एक मालिसियस सॉफ्टवेयर है जो हैकर्स द्वारा कंप्यूटर को ब्लॉक करने के लिए बनाया जाता है, एक बार यह कंप्यूटर में इनस्टॉल हो जाए तो यह पूरे सिस्टम को ब्लॉक/लॉक कर देता है और कंप्यूटर को काम करने से रोक देता है यह एक मैसेज या फाइल भी छोड़ता है जिसका शीर्षक होता है कृपया मुझे पढ़िए(please read me)

मैसेज या फाइल में यह बताया जाता है की कंप्यूटर को क्या हुआ है और कंप्यूटर को ठीक करने या अनलॉक करने के लिए हैकर को एक तय समय सीमा में पैसे देने के लिए कहा जाता है और यदि उस समय सीमा में पैसे नहीं दिए जाते तो हैकर्स द्वारा रकम बढ़ा दी जाती है।

पैसे किसी वर्चुअल मुद्रा जैसे बिटकॉइन में देने के लिए कहा जाता है और जब तक पैसे नहीं दिए जाते कंप्यूटर लॉक ही रहता है।

हम सब इंटरनेट का उपयोग करते हैं पर यदि कोई पूछे की इंटरनेट क्या है और कैसे काम करता है तो हम उसे नहीं समझा पाएंगे इसीलिए हमने इंटरनेट पर पूरा गाइड तैयार किया है और पोस्ट लिखा है, जिसे पढ़कर आप अपनी इंटरनेट के बारे में जानकारी को बढ़ा सकते हैं।

स्पाइवेयर(spyware)

स्पाईवेयर क्या है(What Is Spyware)

स्पाईवेयर एक छोटा दुर्भावनापूर्ण(malicious) प्रोग्राम होता है जो हमारे कंप्यूटर में इमेल्स, दूषित वेबसाइट या प्रोग्राम्स और फाइल्स के जरिये आ जाता है।

स्पाईवेयर हमारे कंप्यूटर में एक जासूस की तरह काम करता है और हमारे कंप्यूटर से छोटी-छोटी जानकारी जैसे सिस्टम की सिक्योरिटी, इमेल्स, यूजर नेम, पासवर्ड, विजिट की गई वेबसाइट की हिस्ट्री आदि हैकर्स को भेजता है।

यह एक बहुत ही खतरनाक मैलवेयर है क्युकि यह सारी महत्वपूर्ण जानकारी सीधे हैकर को भेजता है और हैकर उस जानकारी का गलत उपयोग करके बहुत नुकसान पंहुचा सकते हैं।

बिना किसी प्रीमियम और अच्छे एंटीवायरस के आप स्पाईवेयर के पकड़ नहीं सकते, तो यदि आप स्पाईवेयर को पकड़ना चाहते हैं तो आपको एक अच्छा एंटीवायरस उपयोग करना होगा या अपने कंप्यूटर को फॉर्मेट करना होगा।

एडवेयर(Adware)

एडवेयर क्या है(what is adware)

एडवेयर एक मालिसियस सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है जो कोई भी प्रोग्राम रन करने पर कंप्यूटर स्क्रीन पर बैनर एड्स और पॉप-अप एड्स शो करता है।

एडवेयर यूजर इंटरफ़ेस पर पॉप-अप एड्स, बार एड्स, बैनर और फुल स्क्रीन एड्स शो करता है अधिकतर एडवेयर कम्प्यूटर्स के लिए बनाये जाते हैं पर कुछ एडवेयर एंड्राइड फ़ोन्स पर भी एड्स शो करते हैं।

अधिकतर एडवेयर यूजर को परेशान करने और काम करने से रोकने के लिए बनाये जाते हैं क्युकि ये सिर्फ स्क्रीन पर बार-बार एड्स शो करते हैं, एडवेयर आक्रामक रूप से किसी फाइल को नुकसान नहीं पहुंचते क्युकी इनका मुख्य उद्देश्य सिर्फ यूजर को काम करने से रोकना और स्क्रीन पर एड्स दिखाना होता है।

अगर आपका कंप्यूटर या लैपटॉप स्लो चलता है या आप उसकी ख़राब परफॉरमेंस से परेशान हैं और अपने कंप्यूटर की स्पीड बढ़ाना चाहते हैं, तो आप हमारा पोस्ट कंप्यूटर की स्पीड कैसे बढ़ाएं सिस्टम को सुपरफास्ट कैसे बनायें पढ़ कर अपने कंप्यूटर को पहले जैसे फ़ास्ट बना सकते हैं।

कम्प्यूटर वायरस से बचने के उपाय(The Preventions Of Viruses And Malware)

हमने जाना कि कंप्यूटर वायरस क्या है(Computer Virus Kya Hai) और मैलवेयर और उसके प्रकार भी जाने और यह भी जाना कि ये कितने खतरनाक हैं, पर कम्प्यूटर वायरस से बचने के उपाय क्या हैं कैसे हम अपने कंप्यूटर को वायरस और मैलवेयर से सुरक्षित कर सकते हैं, इसके लिए कुछ काम है जिनमे से कुछ हमें करने चाहिए और कुछ नहीं करने चाहिए, आइये इनके बारे में जानते हैं =>

क्या करना चाहिए(what should do)

  • एंटीवायरस(Antivirus) – एंटीवायरस हमारे कंप्यूटर की सुरक्षा के लिए काम करते हैं पर यदि आप कोई फ्री या बेसिक एंटीवायरस का उपयोग कर रहे हैं तो वह आपके कंप्यूटर से सभी वायरस और मैलवेयर को नहीं पकड़ पायेगा, अगर आप अपने कंप्यूटर को सुरक्षित करना चाहते हैं तो आपको एक paid और अच्छा एंटीवायरस उपयोग करना होगा जो आपके कंप्यूटर से सभी वायरस और मैलवेयर को पकड़ सके और रिमूव कर सके।
  • अनजान ईमेल – अगर आपके पास कही से कोई अनजान ईमेल आता है तो उसे ओपन करने से पहले उसके बारे में पता कीजिए और उसमे दिए गए किसी भी लिंक पर क्लिक मत कीजिए क्युकि उसमे वायरस और मैलवेयर के लिंक्स हो सकते हैं।
  • अनजान और असुरक्षित वेबसाइट – अगर आप कोई अनजान या असुरक्षित वेबसाइट विजिट कर रहे हैं तो उस वेबसाइट से कोई भी फाइल, सॉफ्टवेयर, गाना, मूवी डाउनलोड ना करे, जब भी कुछ डाउनलोड करना हो तो किसी जानी-पहचानी और सुरक्षित वेबसाइट से ही डाउनलोड करें।
  • स्कैन फाइल – जब भी आप कोई फाइल, एप्लीकेशन या सॉफ्टवेयर अपने कंप्यूटर में इनस्टॉल करें तो इनस्टॉल करने से पहले उसे स्कैन जरूर करें ताकि यदि उसमे कोई वायरस हो तो वो पहले पकड़ में आ जाये।
  • मालिसियस पेन ड्राइव या डिवाइस – अगर आप कोई पेन ड्राइव या डिवाइस अपने कंप्यूटर में कनेक्ट करते हैं तो वह आपकी या किसी विश्वसनीय व्यक्ति की होनी चाहिए किसी भी अनजान डिवाइस को अपने कंप्यूटर से कनेक्ट ना करें क्युकि उसमे वायरस हो सकते हैं।
  • सुरक्षित ब्राउज़िंग – जब भी आप इंटरनेट का उपयोग करें तो हमेशा किसी विश्वसनीय और सुरक्षित ब्राउज़र का उपयोग करें क्युकि अधिकतर मैलवेयर और वायरस इंटरनेट के माध्यम से ही हमारे कंप्यूटर में आते हैं।

क्या नहीं करना चाहिए(what shouldn’t do)

  • बिना एंटीवायरस के इंटरनेट का उपयोग न करें।
  • उन इमेल्स को ओपन न करें जिनके भेजने वाले के बारे में या सोर्स के बारे में आप न जानते हों।
  • ऐसी अवैध और असुरक्षित वेबसाइट पर विजिट न करे जो आपको वासना, ऑफर, लालच या किसी अन्य तरीके से प्रलोभन देकर आकर्षित करते हैं और ना ही ऐसी वेबसाइट के किसी लिंक पर क्लिक करें, और ना ही कुछ डाउनलोड करें।

निष्कर्ष

हमने यहाँ जाना कि मैलवेयर क्या है, कंप्यूटर वायरस क्या है, कंप्यूटर वायरस के प्रकार और कंप्यूटर वायरस से बचने के उपाय भी जाने, पर अधिकतर मैलवेयर और वायरस हमारी लापरवाही की वजह से ही हमारे कंप्यूटर में आते हैं इसीलिए हमेशा सुरक्षित ब्राउज़िंग करे, अच्छे एंटीवायरस का उपयोग करे और किसी भी अवैध और असुरक्षित वेबसाइट पर विसिट न करे और ना ही वहाँ से कुछ डाउनलोड करे।

अगर आपको हमारी यह जानकारी और प्रयास अच्छा लगा हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताये और इसी तरह की महत्वपूर्ण जानकियों के लिए हमारे अन्य पोस्ट भी पढ़ें।

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